संगठन के बारे में

गठन

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) का गठन भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 132 की उपधारा (1).के अधीन 31 अक्तूबर, 2018 को किया गया था।

  • प्रकार्य और कर्त्तव्य

    कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 132 की उपधारा (2), के अनुसार, एनएफआरए के कर्त्तव्य:

    • केंद्रीय सरकार द्वारा अऩुमोदन के लिए लेखाकर्म और लेखापरीक्षा नीतियां तथा कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले मानकों की अनुशंसा करने के लिए;
    • लेखाकर्म मानकों और लेखापरीक्षा मानकों सहित अनुपालन वाले की निगरानी और लागू करना;
    • ऐसे मानकों सहित अनुपालन सुनिश्चित करने वाले व्यवसायों की सेवा की गुणवत्ता का पर्यवेक्षण करने के लिए;
    • ऐसे अऩ्य प्रकार्य और कर्त्तव्यों का निष्पादन करने के लिए हैं जो उक्त प्रकार्यों और कर्त्तव्यों के लिए आवश्यक अथवा अनुषंगी हो। .



एनएफआरए नियम, 2018 के नियम 4 के उप-नियम (1) ,में यह व्यवस्था है कि यह प्राधिकरण जनहित और निवेशकों, लेनदारों और कंपनियों अथवा नियम 3 के अधीन प्रशासित कारपोरेट निकायों के साथ संबद्ध अऩ्य के हितों को लेखाकर्म तथा लेखापरीक्षा के उच्च गुणवत्ता मानक स्थापित करके और कंपनियों तथा कारपोरेट निकायों द्वारा निष्पादित लेखाकर्म प्रकार्यों और लेखापरीक्षकों द्वारा निष्पादित प्रकार्यों की लेखापरीक्षा का प्रभावी पर्यवेक्षण करके संरक्षित करेगा।

  • इस प्राधिकरण द्वारा प्रशासित कंपनियां और कारपोरेट निकाय

    एनएफआरए नियम, 2018 के नियम 3 के अनुसार,स प्राधिकरण लेखाकर्म मानकों और लेखापरीक्षा मानकों के साथ अनुपालन की निगरानी और प्रवर्तन, धारा 132 की उप-धारा (2) के अधीन सेवा की गुणवत्ता का पर्यवेक्षण अथवा कंपनियों और कारपोरेट निकायों के निम्नलिखित वर्ग के लेखापरीक्षकों की इस धारा की उप-धारा (4) अधीन जांच करने की शक्ति होगी, अर्थात्:

    • क) वे कंपनियां जिनकी प्रतिभूतियां भारत अथवा भारत से बाहर किसी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं;
    • (ख) वे असूचीबद्ध पब्लिक कंपनियां जिनकी प्रदत्त पूंजी पांच सौ करोड़ रुपये से कम न हो अथवा वार्षिक कारबार एक हजार करोड़ रुपये से कम न हो या कुल मिलाकर बकाया ऋण, डिबेंचर और जमाएं 31 मार्च को तत्काल पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष तक पांच सौ करोड़ रुपये से कम न हो;
    • (ग) बीमा कंपनियां, बैंकिंग कंपनियां, बिजली उत्पादन अथवा आपूर्ति से जुड़ी कंपनियां, उस समय लागू किसी विशेष अधिनियम द्वारा प्रशासित कंपनियां या इस अधिनियम की धारा 1 की उपधारा (4) के खंड (ख), (ग), (घ), (ड.) और (च) के अनुसार किसी अधिनियम द्वारा निगमित कारपोरेट निकाय;
    • जनहित में केंद्रीय सरकार द्वारा इस प्राधिकरण को सौंपे गए किसी संदर्भ पर किसी कारपोरेट निकाय या कंपनी अथवा व्यक्ति, या कारपोरेट निकायों अथवा कंपनियों या व्यक्तियों का कोई वर्ग; और
    • निगमित अथवा भारत से बाहर पंजीकृत कोई कारपोरेट निकाय जो खंड (क) से (घ) में यथासंदर्भित भारत में निगमित अथवा पंजीकृत कोई कंपनी या कारपोरेट निकाय या कोई सहायक अथवा संबद्ध कंपनी, यदि ऐसी सहायक अथवा संबद्ध कंपनी की आय अथवा निवल मूल्य के संचयी आय अथवा संचयी निवल मूल्य, ऐसी कंपनी अथवा कारपोरेट निकाय, जैसा भी मामला हो, खंड (क) से (घ) में संदर्भित, के बीस प्रतिशत से अधिक हो।